हां, मैं एक लड़की हूं ... मेरा खुले आसमान में उड़ना , तुमको क्यों नहीं सुहाता ? यह मत करो, वह मत करो , हर कोई मुझे यही समझाता। हां, मैं एक लड़की हूं ... मेरा पैदा होना भी , क्या कोई पाप है ? आजादी तो मिली नहीं , लगता है ये कोई श्राप है । हां, मैं एक लड़की हूं ... ख़्वाब होते हुए भी , बंधी हू मै जंजीरों से । कब तक हम खुदको बचाए , दुनिया की बाज रूपी नज़रों से । हां , मैं एक लड़की हूं ... देवी कहकर सब पूजते है , दिया है उपाधि माता का । सहना सब कुछ चुप रह कर तू । हर कोई है यही बताता । हां, मैं एक लड़की हूं ... कहते है सब यही है मेरी किस्मत , फिर मुझे दुनिया में लाया कौन ? बेटी होती है पराया धन । ऐसा भ्रम समाज में फैलाया कौन ? हां, मैं एक लड़की हूं ... इस खुले आसमान में , अभी बहुत ऊंचा उड़ना है । मालूम है मुझको मेरी हद , फिर भी मुझे आगे बढ़ना है । हां, मैं एक लड़की हू ... काश मेरे सपनों को भी , कोई तो आकर पंख लगाता । तू तो है मेरी लाडली बेटी , ऐसा कहकर कोई मुझे भी अपनाता । हां, मैं एक लड़की हूं ... हम भी है अंश प्रकृति के , नहीं सहेंगे अब अत्याचार । करने फिर से जलिमो का खात...