एक है , फिर अनेक क्यू ?

एक है , फिर अनेक क्यू ?

इंसान एक है ,
फिर धर्म अनेक क्यू ?

देश एक है ,
फिर झेंडे अनेक क्यू ?

प्रकृति एक है , 
फिर विश्वास अनेक क्यू ?

धरती एक है ,
फिर समाज अनेक क्यू ?

नियम एक है ,
फिर प्रथा अनेक क्यू ?

रक्त एक है ,
फिर भेद अनेक क्यू ?

मालिक एक है ,
फिर अधिकार अनेक क्यू ?

ज्ञान एक है ,
फिर शिक्षा अनेक क्यू ?

दृष्टि एक है ,
फिर रंग अनेक क्यू ?

पूजा एक है ,
फिर देवालय अनेक क्यू ?

प्रेम एक है ,
फिर नाते अनेक क्यू ?

- संतोष पांडेय ✍

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