"Dear Self, I will win, I promise!"
आज 31 दिसंबर 2025 है। बाहर गलियों में शोर है, बच्चे पटाखे जला रहे हैं और हर तरफ 'Happy New Year' का शोर सुनाई दे रहा है। लोग अपनी डायरियों में नए साल के बड़े-बड़े संकल्प (New Year Resolutions) लिख रहे हैं - कोई जिम जाने की सोच रहा है, तो कोई विदेश घूमने की। लेकिन मैं? मैं अपनी मेज पर बैठकर पिछले साल के खर्चों का हिसाब लगा रहा हूँ। सच कहूँ तो, मेरे लिए नया साल किसी जश्न की तरह नहीं, बल्कि एक और बड़ी जिम्मेदारी की तरह आता है। कभी-कभी रात को जब सब सो जाते हैं, तो मैं अकेला बालकनी में खड़ा होकर अपनी बाइक को देखता हूँ। मुझे याद आता है कि मुझे घूमने (Traveling) का कितना शौक था। मन करता था कि बस बाइक उठाऊं और पहाड़ों की ओर निकल जाऊं। लेकिन आज वो बाइक सिर्फ ऑफिस जाने और घर का राशन लाने का एक साधन बन गई है। मेरा पैशन कहीं इन जिम्मेदारियों के नीचे दबकर दम तोड़ रहा है। मेरे पास दो फ्लैट्स की EMI है। लोग कहते हैं, "संतोष, तेरे पास तो दो-दो घर हैं," पर उन घरों की किश्तें चुकाते-चुकाते मेरी अपनी रातों की नींद उड़ गई है। वो चेहरे जो मेरी हिम्मत भी हैं और मेरी फिक्र भी मेरे घर के हर...