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Showing posts from April, 2021

लिंबु-टींबू प्रयास...

... वैसे वो तो मानने से रही I उसे बस मेरे साथ दोस्ती का सुदृढ़ रिश्ता बनाए रखना था I शादी या प्रेम में उसकी कोई रुची नही थी I एकदम झल्ली सी है वो I अक्कल से भी पैदल ही है वो... एक दिन बातों ही बातों में मैंने उससे उसकी बहन के बारे मे पूछा I तो वो कहने लगी की - " ती आजुन लहान आहे रे, पांडेय ! " तो मैंने कहा - " कसली लहान ग बाई ? इंस्टाग्राम स्टेटस बघून तर मला असं वाटत नाही I " फिर वो बोली की वैसे भी उसकी बहन तो उससे भी सुंदर है I मैंने भी कहा की फिर एक प्रयास करने में हर्ज ही क्या है ? उसने भी कहा की हाँ करले प्रयास , लेकिन तेरेसे कुछ नहीं होगा । मैंने कहा देखते है I सबसे अधिक कमाल की बात ये थी कि इसके सारे घरवाले मुझे जानते है I उसकी छोटी बहन भी मुझे इंस्टाग्राम पर फॉलो करती है I तो मैंने भी सोचा की कुछ तो हो ही सकता है I इंस्टाग्राम संदेश के सहारे मैंने धीरे धीरे इस सिलसिले को आगे बढ़ाया। कुछ दिनों बाद उसकी आत्या के सहारे मुझे उसके जन्मदिन का पता चला I मैंने भी सोचा की यही सही मौका है उसे इम्प्रेस करने का I रात के ठीक बारह बजे मैंने उसे उसके जन्मदिन पर संदेश क...

मोनू हँसी, लेकिन ..

... वैसे तो हम सब बहुत ही थक चुके थे I पैदल यात्रा करके हालत तो पहले ही पंचर थी और ऊपर से धूप का भी कडा पहारा था I बस गाँव मे जाकर हमें खाना-पानी मिल जाये, यही सोचकर हम चले जा रहे थे I लगभग दोपहर के १२:०० बजे हम गाँव मे पहुंचे, जहां हमारी बस खड़ी थी I सभी के आने के बाद हम झटपट से बाँध की ओर निकल पड़े I वहां, जब हम सबने ठंडे पानी से अपना हाथ मुह धोया, तब जाकर हमे थोड़ा-सा अच्छा महसूस हुआ I फिर वहां से हम होटल की ओर निकल पडे I होटल जाते हम सबने भर पेट खाना खाया और अपने पेट के भूखे चूहों को को शांत किया l बातों-ही-बातों में उसने अपना भ्रमणध्वनी निकाला और हमें अपनी कुछ लाजवाब तस्वीरें दिखाई I किन्तु, हकीकत तस्वीर से बिल्कुल अलग थी I बस उसी पल से मेरे मन में भी उसे जानने की जिज्ञासा जाग गई। सबका खाना होने के बाद हम अपने शहर अर्थात घर की ओर निकल पड़े I पहले कुछ घंटे सभी ने आराम करने का फैसला किया और देखते ही देखते सभी लोग सो गए I वो भी बस के पीछे वाली सीट पर झपकियां ले रही थी I लेकिन मैं ठहरा शैतान, सफर भी लंबा था.. इसीलिए मैंने ठान लिया की इसे सोने नहीं देंगे अब I इसी के विपरित, वो तो एकद...

मी, एप्रिल फूल आणि आइस क्रीम...

... चक्क आज १ एप्रिल चा दिवस होता. नेहमी प्रमाणे सकाळी उठून, नित्य क्रिया करून, आंघोळ आणि नास्ता करून कामाला सुरुवात केली. कोरोना मुळे घरूनच काम करायचं होतं. मात्र मला लक्षात नव्हतं की आज एप्रिल फूल करतात लोक. संध्याकाळी ६:४५ च्या जवळपास आत्याचा मेसेज आला की कोंबडी तुला भेटायला आली होती का ? मी बोललो - " नाही ! पण का ? ". मग आत्या बोलली की ती सकाळी पासून बाहेर गेलीय, पण आजुन घरी आलीच नाही. मग मला पण आला टेंशन, कारण ती अशी करत नाही. तिचा फोन पण बंद, एक तास प्रयत्न केला, पण काहीच प्रतिक्रिया नाही. काही ओळखीच्या मित्रांना पण विचारलं, पण त्यांना सुद्धा काहीच माहित नव्हता. मग शेवटी काम उरकून, मी तिला शोधायला निघालो. घरी पण सांगितलं की कोंबडी बेपत्ता आहे, म्हणून चाललोय तिला शोधायला. त्यातच तिला इथे-तिथे शोधतच होतो की कोंबडीचा फोन लागला. मी विचारल तिला की - " कुठे आहे ग बाई ? ", तर तिचा हसून उत्तर येतं की मुंबईला. मग मी तिला ओरडलो की - " सांगून तर जात जा ना ! ". तर ती म्हणे की तुझ्या सोबत आत्याने प्रँक केला. लय राग आला मला, पण जाऊदे बोलून दिला सोडून. आत्यानी नंतर...