भारत में Gender Equality: क्या सच में बराबरी हो रही है या एक नया असंतुलन बन रहा है?
भारत में Gender Equality: क्या सच में बराबरी हो रही है या एक नया असंतुलन बन रहा है? प्रस्तावना: एक जरूरी लेकिन असहज सवाल आज “Gender Equality” सिर्फ एक चर्चा का विषय नहीं, बल्कि समाज का एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। हर जगह इसकी बात हो रही है - घर में, सोशल मीडिया पर और कोर्ट के फैसलों में भी। हम यह मानते हैं कि इतिहास में महिलाओं के साथ अन्याय हुआ - और उसे सुधारना जरूरी था। लेकिन आज एक सवाल उठता है: - क्या आज का सिस्टम सच में बराबरी दे रहा है? - या कहीं हम एक समस्या को सुधारते-सुधारते दूसरी समस्या पैदा कर रहे हैं? पहले की सच्चाई: क्यों जरूरी थे महिलाओं के लिए कानून अगर हम डेटा देखें, तो समझ आता है कि महिलाओं की स्थिति क्यों कमजोर थी: - भारत में आज भी कई महिलाएं आर्थिक रूप से स्वतंत्र नहीं हैं। - महिला श्रम भागीदारी लगभग 32.8% है, जबकि पुरुषों की 77% 👉 इसका मतलब है कि आज भी बड़ी संख्या में महिलाएं आर्थिक रूप से पीछे हैं। इसके अलावा: - 32% शादीशुदा महिलाओं ने घरेलू हिंसा का अनुभव किया है (NFHS-5) - 2022 में महिलाओं के खिलाफ अपराध दर 66.4 प्रति लाख रही 👉 साफ है कि महिलाओं क...