"Dear Self, I will win, I promise!"
आज 31 दिसंबर 2025 है। बाहर गलियों में शोर है, बच्चे पटाखे जला रहे हैं और हर तरफ 'Happy New Year' का शोर सुनाई दे रहा है। लोग अपनी डायरियों में नए साल के बड़े-बड़े संकल्प (New Year Resolutions) लिख रहे हैं - कोई जिम जाने की सोच रहा है, तो कोई विदेश घूमने की।
लेकिन मैं? मैं अपनी मेज पर बैठकर पिछले साल के खर्चों का हिसाब लगा रहा हूँ। सच कहूँ तो, मेरे लिए नया साल किसी जश्न की तरह नहीं, बल्कि एक और बड़ी जिम्मेदारी की तरह आता है।
कभी-कभी रात को जब सब सो जाते हैं, तो मैं अकेला बालकनी में खड़ा होकर अपनी बाइक को देखता हूँ। मुझे याद आता है कि मुझे घूमने (Traveling) का कितना शौक था। मन करता था कि बस बाइक उठाऊं और पहाड़ों की ओर निकल जाऊं। लेकिन आज वो बाइक सिर्फ ऑफिस जाने और घर का राशन लाने का एक साधन बन गई है। मेरा पैशन कहीं इन जिम्मेदारियों के नीचे दबकर दम तोड़ रहा है।
मेरे पास दो फ्लैट्स की EMI है। लोग कहते हैं, "संतोष, तेरे पास तो दो-दो घर हैं," पर उन घरों की किश्तें चुकाते-चुकाते मेरी अपनी रातों की नींद उड़ गई है।
वो चेहरे जो मेरी हिम्मत भी हैं और मेरी फिक्र भी
मेरे घर के हर कमरे में एक अलग कहानी है:
1. एक तरफ बीमार माँ और रिटायर्ड पिता हैं। पिताजी अब 60 के हो गए हैं, उनका शरीर थक गया है। माँ की दवाइयां समय पर आएं, इसके लिए मैं दिन-रात एक कर देता हूँ।
2. दूसरी तरफ छोटा भाई है, जिसके करियर और उसकी नासमझी (Maturity) को लेकर मैं हमेशा तनाव में रहता हूँ। लगता है कब वो अपनी जिम्मेदारी समझेगा?
3. फिर मेरी पत्नी है। उसकी अपनी जिद है, अपने सपने हैं। उसकी पढ़ाई जो बीच में छूट गई थी, उसे पूरा करवाना मेरा सपना बन गया है। मैं चाहता हूँ वो अपना करियर बनाए, पर इन सबमें तालमेल बिठाना बहुत मुश्किल होता है।
4. और मेरी 2 साल की बेटी... उसकी एक मुस्कान मेरा सारा दिन भर देती है, पर साथ ही उसके भविष्य की चिंता मुझे डरा देती है।
इन सबके बीच मेरी Job ही मेरा एकमात्र सहारा है। ऑफिस का pressure, task का tension, वो सब सह लेता हूँ, क्योंकि पता है कि अगर ये नौकरी नहीं रही, तो ये पूरा संसार बिखर जाएगा।
दोस्तों से मिले हुए जमाना हो गया, fitness पूरी तरह बिगड़ चुकी है और चेहरा थका-थका रहने लगा है।
"क्या मैं हार गया हूँ? Am I really a failure?"
नए साल की इस पूर्व संध्या पर, मेरा दिमाग भी मुझसे पूछता है - "क्या तू हार गया है, Santosh? क्या तू अपनी खुशियों की बलि देकर सिर्फ एक machine बनकर रह गया है?"
तभी मेरे मन के अंदर से एक आवाज़ आती है - "नहीं! तुम Failure नहीं हो, तुम एक Warrior (योद्धा) हो।"
असली मजबूती तो इसमें है कि जब दुनिया सो रही होती है, तब तुम जागकर अपने परिवार के कल के बारे में सोचते हो।
- वो EMI इस बात का सबूत है कि तुमने अपने दम पर अपने परिवार को सिर छुपाने की जगह दी है।
- माँ-बाप की सेवा करना यह बताता है कि तुम एक बेहतरीन बेटे हो।
- पत्नी के सपनों की फिक्र करना तुम्हें एक महान पति बनाता है।
इस साल मैं कोई ऐसा वादा नहीं करूँगा जो मैं निभा न सकूँ। इस साल मेरा संकल्प बहुत छोटा है:
- खुद के लिए 30 Minute: मैं अपनी fitness के लिए हर रोज थोड़ा वक्त निकालूँगा। क्योंकि अगर मैं ठीक हूँ, तभी मेरा घर ठीक है।
- एक छोटी Trip/Trek: चाहे सिर्फ आसपास ही क्यों न हो, मैं अपनी बाइक लेकर एक दिन के लिए कहीं बाहर जाऊँगा। खुद को फिर से वो ताजी हवा दूँगा।
- बातचीत: मैं अपनी पत्नी से और अपने भाई से दिल खोलकर बात करूँगा। उन्हें बताऊंगा कि मैं क्या महसूस करता हूँ।
साल बदल रहा है, तारीखें बदल रही हैं, और मैं भी अपनी सोच बदल रहा हूँ। अब मैं एक जिंदादिल इंसान बनूंगा। अब मेरा हर एक किरदार इस साल से बेहतर होगा।
मेरे जैसे हर उस आदमी को नया साल मुबारक, जो खामोशी से अपने परिवार का बोझ उठा रहा है। आप ही इस दुनिया के असली "Hero" हैं।
- संतोष पांडेय
Happy new year Santosh we can do it bro don't warry. this too shall pass.
ReplyDeleteShifting the perspective from Responsibility to Challenge, Will definitely change the way you look at the situation. Hope it helps. Happy New Year ✌️
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