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अलविदा " बर्फी "...

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तुफानी मौसम था । सुबह से लगातार जोरों से वर्षा हो रही थी I मानो वर्षा बंद होने का नाम ही नहीं ले रही हो I उस समय, मैं सह परिवार अपने गाँव वाले घर पर था I इसी बीच, मुझे एक गिलहरी के चिल्लाने की आवाज आने लगी I पहले तो मुझे लगा की ये तो आम बात है, लेकिन फिर वो आवाज घर के बाहर स्थित नाली से आने लगी I मैं झट से छाता लेकर देखने गया की आखिर बात क्या है I तो मैंने देखा की गिलहरी का एक छोटा सा शिशु नाली में पड़ा भीग रहा है I ठीक उसी समय, टिंकल भैय्या आ गए और उसे अपने छत पर ले गए I उसे बिस्कुट और दूध भी दिया I फिर, वहां से बिना देरी किए मैं तुरंत उसे अपने घर ले आया I थंडी के मारे वो काप रही थी I लगभग उसका पूरा बदन भीग चुका था I मैंने तुरंत एक सूखे कपडे मे उसे रख दिया I रुई से उसके शरीर को पोछा I उसे गरम जगह पर रखा। भाभी से मैं एक उन का मोजा मांग लाया, ताकि उसे थंडी ना लगे I उसके लिए एक बक्से में उसका घर बनाया I लेकिन फिर भी उसकी हालत इतनी खराब थी की मुझे समझ नहीं आ रहा था क्या करु I अब तक उसकी आंखे भी खुली नहीं थी I मैंने इंटरनेट के माध्यम से कुछ जानकारियां हासिल की l जानकारियों के हिसाब से उसकी...

स्वरुप ...

कैसे बताऊँ शब्दों में, राधा मेरी कैसी थी ! देख उसे सूद-बुद खो जाए, अदा ही उसकी कुछ ऐसी थी ! ~ संतोष पांडेय 

...भैयाजी प्रणाम !

घर में शादी ब्याह का माहौल था I चारो ओर उत्साह का वातावरण था I तिलक का समय हो चुका था I दुल्हनवाले भी आ चुके थे I मैं भी रस्मों को देखने के लिए छह पर खड़ा था I इसी बीच पायल की झंझनाहट करती हुई एक लड़की वहां आ पहुंची I गोरा-सा मुखडा, कान में बाली और घाघरा में एकदम हूर की परी लग रही थी I मानो, बालवीर सिरियल की परी हकीकत में प्रकट हो गई हो I इसी बीच चाचाजी आ गए और बोले - " बेटा ! नीचे तुम्हारी चाची की भतीजी आई है, उसे अपने साथ ऊपर ले आओ I " मैं खुश होकर झट से नीचे गया, और उससे कहा की चाचाजी ने ऊपर बुलाया है I जैसे ही मेरा बोलना खत्म हुआ, उसने झट से मुझसे कहा, " आप तो वो पूना वाले भैयाजी है ना ! प्रणाम स्वीकार कीजिए I" ये सुनने के बाद मन ही मन मैं बोल पड़ा की मैं पूना वाला भैया के साथ चुना वाला भैया भी हु I जब देखो तब उपरवाला मुझे चुना ही लगाता है I ~ संतोष पांडेय ✍