मिनी हेलीकॉप्टर !

" फुर्रर्रर्रर्रर्र फुर्रर्रर्रर्रर्र फुर्रर्रर्रर्रर्र "। मै हूं मिनी हेलीकॉप्टर। मशीन वाला नहीं जनाब , जीता-जागता हेलीकॉप्टर हूं। अब ये नाम मैंने खुद ने तो रखा नहीं है। आप सभी की ही देन है। याद है बचपन में आप लोग मुझे देखकर हेलीकॉप्टर-हेलीकॉप्टर चिल्लाने लगते थे। वैसे तो मै एक छोटा सा जीव हूं , लेकिन नाम मुझे बड़ा मिला है। सचमुच , वो भी क्या दिन थे। इसी सोच के साथ कल मै भ्रमण पर निकला था और मेरी मुलाकात पांडु दादा ( लेखक महोदय ) से हो गई। तो मैंने भी उन्हें कहा कि एक-दो फोटो मेरा भी निकाल लो। 

वैसे बहुत ही सताया है आप लोगो ने मुझे। मुझे पकड़कर , मेरे पीछे रस्सी बांधकर , आप लोग मुझे पतंग की तरह उड़ाते थे। वैसे मुझे पकड़ना कोई आम बात तो नहीं , फिर भी आप मेसे कई लोगो ने मेरे साथ अपनी बचपन बिताई होगी। एक समय था जब मै हर जगह होता था। मुझे भी आप जैसे बच्चो के साथ खेलना पसंद आता था।

लेकिन आजक के युग में धीरे धीरे इंसान बदल रहा है। प्रकृति की बनाई चीजो से अधिक उसे मशीनी चीजे इस्तेमाल कर रहा है। वैसे हम जीवों की भाती अगर खिलौने बना दिए जाए , तो वो आपको पसंद आएगा। आप बड़े बड़े मूल्यों पर उसे खरीदोगे भी। बाद में टूट जाए पर रोने भी लगोगे। लेकिन हम जीवंत जीवों का आपके जीवन में कोई अस्तित्व नहीं है। हम मर भी जाए तो किसीको कुछ फर्क भी नहीं पड़ेगा। आप सभी के लिए तो हम बस कीड़े है ना! आपकी भाषा में कहा जाए तो कंटेंट प्रकृति का है , लेकिन उसका कॉपीराइट आप इंसानों ने के रखी है।

मोबाइल , टीवी और ना जाने ऐसे कितने यंत्रों पर इंसान आज पूरी तरह अवलंबित हो चुका है। इन्हीं चीजों को बढ़ावा देने की वजह से आज प्रकृति पर संकट बना हुआ है। हम जैसे कई जीव लुप्त होते जा रहे है। और अगर इसी तरह तुम इंसानों ने प्रकृति के साथ मजाक किया और उसे संभालकर नहीं रखा , तो वो दिन दूर नहीं जब आप सभी लोगो की हालत भी हम कीड़े मकोड़े की तरह हो जाएगी। इसका उत्तम उदाहरण है कोरो ना संकट। इसीलिए कहता हूं अभी भी मौका है , सुधार जाओ और प्रकृति की रक्षा करो।

यही सब देखकर मुझे एक कविता के कुछ वाक्य याद आ गए। वो है - " देख तेरे संसार की हालत क्या हो गयी भगवान,
कितना बदल गया इंसान..कितना बदल गया इंसान।। "

बाकी अगर आपके पास भी मेरी कुछ याद होगी , तो जरूर बताना। सुनने में मजा आयेगा।

एक विलुप्त मित्र,
मिनी हेलीकॉपटर

- संतोष पांडेय ✍

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