बात है Championship Trophy की !

Engineering का था अंतिम साल ,
नोकरी की तलाश में थे सब बेहाल ।
सबके सहायक थे पंकज मास्टर ,
संभाले रखा था Computer का स्तर ।
एक बात जुड़ गई प्रतिष्ठा से ,
सबने शपथ लिया निष्ठा से ।
मिलकर एक हुए BE-TE-SE के परिवार ,
सबने मिलकर की सेना तैयार ।
बज गया स्पर्धाओं का ढोल ,
हर जगह से उठे हमारे बोल ।
जिन्होंने भी सोचा था हमे हल्का , 
उन्हीं के सामने मचाया तहलका ।
हर क्षेत्र में किया था हमने वार ,
गूंज उठा नाम हमारा बार बार ।
जब अंत में आई विजेता की बात ,
कुछ ने दिया राजनीति का साथ ।
था जिसपर हमारा अधिकार ,
बिना लिए चुप कैसे रहता परिवार ।
फिर सच के सहारे हम हुए खड़े ,
चुप हो गए सारे बड़े बड़े ।
फिर हम सबने उठाया सिर पर लंका ,
बज गया फिर से Computer का डंका ।
बस अंत में हमे है सबसे कहना। ,
मकसद नहीं हमारा किसीको दिल दुखाना ।

ये बात नहीं कोई चाय कॉफी की ,
ये बात तो है एक Championship Trophy की ।

- संतोष पांडेय ✍

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