नाम मेरा आलू !

हा , मै हूं आलू !

जी आपने सही सुना , आलू। आप सभी मुझे बटाटा , पोटेटो ओर बा जाने कई नामो से पुकार सकते है । वैसे नाम तो सुना ही होगा । मै वहीं हूं जो कभी आप लोगो के लिए वडा बन जाता हूं , तो कभी फ्रेंच फ्राईस ; कभी सैंडविच का स्लाइस , तो कभी आलू दम की सब्जी। आप जैसे चाहो वैसे मेरा इस्तेमाल कर सकते हो। आखिर जाना तो पेट मी है ना! वैसे तो मेरा मेरा मूल गांव आलुनगर है , लेकिन अपने घूमक्कड़ स्वभाव की वजह से कहीं भी चला जाता हूं ! अब आप सब गूगल मैप पर ये पत्ता मत ढूंढ़ना , क्युकी मै आपके घर में भी उपस्थित हूं। 

वैसे अकड़ ओर भाव तो मुझमें भी है। थोड़ा थोड़ा भाव मै भी खा लेता हूं। मेरे भाव बढ़ गए तो अमीरों का पेट भरता है , ओर भाव घट गए तो गरीबों का पेट भरता है । आखिरकार संतुलन जो बनाए रखना है। तभी भी लोग हमारी बदनामी करने से नहीं चूकते। कोई बोलता हमे खाने से मोटे हो जाओगे , तो कोई बोलता है गैस हो जाएगा। अब क्या करे , लोगो का काम है बोलना।

वैसे आज मै आपको हमारे परिवार से मिलाना चाहता हूं । आपको सुनकर आश्चर्य होगा , लेकिन जी हा! हमारे भी परिवार होते है । सकल सूरत लगभग एक जैसी होने कि वजह से लोगो को पता नहीं चलता। 

लेकिन आज मुझे पांडेय घराने के एक लड़के ने खुलकर बोलने की आजादी दी। हमे सोशल मीडिया पर एक पहचान दिया। एक स्टेज दिया , जहां हम जैसे अनेक लोग अपनी बातो को लाखो तक पहुंचा सकते है। मै उस लड़के का तहे दिल से धन्यवाद करता हूं।

अंत में आप सबसे एक बात जरूर कहूंगा  " कर्म कर , फल मिल जाएगा " । क्युकी देखो , हमे भी काटा जाता है , उबाला जाता है , मसालों में मिलाया जाता है और पेट में दाल दिया जाता है। यह हमारा कर्म है , नियती है और हम खुश है कि हम लोगो का पेट भर रहे है। गर्व है हमे इस बात पर। हम सबको जीवन में कुछ ऐसा करना चाहिए कि हमारे कर्मो से लोग हमे जाने ओर खुद को भी गर्व हो।

आपका प्यारा,
आलू 

- संतोष पांडेय ✍️

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