मणिकर्णिका - एक जलता घाट !

मणिकर्णिका - एक जलता घाट 🔥

यह देह बस एक काया है ।
जलने का दुख बस एक माया है ।।

होता है सबका यहां अंतिम संस्कार ।
कहते सब यही है स्वर्ग का द्वार ।।

यहां जो आए बन जाए राख ।
मिट्टी में मिलकर हो जाए खाक ।।

जो चिता जली वहीं सत्य है ।
जीवन के अन्त का मृत्यु ही तथ्य है ।।

पापो का बोझ यहां जल जाता ।
तब जाकर इंसान मोक्ष है पाता ।।

जन्म हुआ तो थे सब नंगे ।
अंतिम यात्रा में बोले हर गंगे ।।

अग्नि का स्पर्श जैसे पारस ।
गंगा और ये शहर बनारस ।।

जब तुझे सौभाग्य बुलाएगा ।
देखना तू भी मणिकर्णिका घाट जरूर आएगा ।।

- संतोष पांडेय ✍

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