हम है आम , आम है हम !
...हम है आम , आम है हम।
"... हम है आम , आम है हम। " कैसन लागल हमार एंट्री। जी हा , सही पकड़े है। हम है फलों के राजा - आम। नाम तो आम है , लेकिन लोगो के जीवन में मेरा ख़ास महत्व है। मुझे खाते समय मेरे स्वाद की मिठास से लोग झूम उठते है। कुछ लोग तो मेरी सुगंध के ही दीवाने है। मेरा बचपन और युवा अवस्था , दोनो ही कमाल का है।
मैं वो हूं जिसे गर्मियों के मौसम में बड़े चाव से खाया जाता है। मैं भले ही अपने बचपन के दिनों में छोटे आकार व खाने में खट्टे स्वाद वाला था, परंतु जैसे-जैसे मैं बड़ा हुआ तो समय के साथ मेरा आकार व अन्य चीजें भी पहले से भिन्न होती गई। अब मेरा स्वाद बहुत मीठा हो चुका है। कुछ लोग हमें कच्चा खाना भी पसंद करते हैं। मेरे बाल्यावस्था का स्वाद तो गर्भवती स्त्रियां भी लेती है। क्योंकि उन्हें हमारा खट्टा स्वाद नमक के साथ लगाकर खाने में ही अधिक आनंद आता है। बच्चे भी हमें कच्चा खाना पसंद करते हैं।
बचपन में मेरा रंग सिर्फ हरा था, परंतु आज मेरा रंग मुख्यतः पीला है। इसके अलावा मैं थोड़ा सा हरा और लाल भी हूं। वैसे तो मेरी कुछ अन्य प्रजातियां ऐसी भी हैं जिनका रंग बड़े होने पर भी सिर्फ हरा ही रहता है। वैसे चोरी के मामले में भी मेरा अच्छा योगदान है। खासकर बच्चे तो मुझे बचपन में ही सफाचट कर जाते है। पत्थरों के मार भी मैंने बहुत सहे है। लेकिन उसका भी अपना एक अलग ही आनंद होता है। अब इससे ज्यादा अपनी क्या तारीफ करू। मुझे कहा कहा इस्तेमाल किया जाता है ये सभी को पता ही है।
इतना बड़ा हो जाने के बाद भी मैं अभी चटाई पर पड़ा हुआ हूं। मेरे साथ के अधिकतर रिश्तेदार कुछ समय पहले ही खाए जा चुके हैं और अब मैं भी यही प्रतिक्षा कर रहा हूं कि कब मुझे कोई इस चटाई से उठाएगा और मेरा स्वाद चखेगा। जब कोई मेरा स्वाद चखेगा, तो उस समय मेरा रस उसकी जीभ पर पड़ते ही उसका मन आनंदित हो उठेगा और उसे आनंदित देखकर मैं अपने आप को अत्यंत ही भाग्यशाली मानूंगा कि मेरे कारण किसी के मुख पर प्रसन्नता आई व मन आनंदित हुआ।
लेकिन आज हम चार भाई एक साथ है इस बात की मुझे बहुत खुशी है। आज हमने फोटोशूट भी किया , हमारे आंख , नाक , कान , मुंह लगाए गए। तभी तो मौका मिला मुझे बोलने का। वैसे कोरोना की वजह इस बार हमारे विक्री में भी मंदी अाई है। कुछ लोग तो फुकट में हमारी विक्री कर रहे है। लेकिन हमे तो मजा आ रहा। शांति से जीवन जी रहे है हम। इसी बात पार चलो एक बचपन कि कविता हो जाए -
" देखो ये मुस्काते आम , सबके मन को भाते आम।
मीठी-मीठी महक बिखेरें, मस्त चटाई पर सुस्ताते आम।।
प्यारे बच्चो जल्दी आओ, दे आवाज बुलाते आम।
भरे विटामिन-ए से होते , सेहत पुष्ट बनाते आम।।
बन स्वादिष्ट पना गुणकारी , लू को दूर भगाते आम।
बस कोई ज्यादा मत खाना , फोड़े भी करवाते आम।। "
फलों का राजा ,
आम 🥭
- संतोष पांडेय ✍
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