मैं हूँ याद !

मै , कौन हूं मै ? सोचिए जरा। मै वो हूं जो आपके साथ हमेशा होता हूं। सुख में भी , दुख में भी । मेरा साथ इंसान के जन्म से लेकर मरण तक है। जी हां ! सही सोचा आपने , मै हूं " याद "। चौंकिए मत , मै तो आपकी सारी वो घटनाएं हूं , जो आप अपने दिमाग में , तस्वीरों में , पुस्तकों में , इतिहास में रखते है। कुछ लोग मुझे भूतकाल , तो कुछ लोग मुझे बीती लम्हें कहते है। किसी के लिए मै सुखदायक हूं , तो किसी के लिए दुखदायक हूं। कोई मुझे रखता है तो , कोई फेक देता है। मै कभी बचपन बन जाता हूं , तो कभी शरारत; कभी दोस्त बन जाता हूं , तो कभी अभिमान ; कभी दर्द बन जाता हूं , तो कभी बदलाव।

आज लेखक महोदय बड़े मजे से फोटो एल्बम खोलकर मेरा आव्हान कर रहे है। देखिए तो कितने खुश है। लगता है इन्हे कोई खाजीना मिल गया हो। लोगो को खुश देख बड़ा आनंद होता है मुझे। जब लोग एकसाथ बैठकर , मुझे बुलाते है तो मै भी खुश हो जाता हूं। मै इंसान के लिए जमा कोष की तरह हूं , जिसे वो जब चाहे वैसे इस्तेमाल कर सकता है। मेरे पास इंसानों के भूतकाल काल का सारा कच्चा-चिठ्ठा है। लेकिन आपको पता है , कभी कभी एक इंसान दूसरे को इंसान को क्या कहता है ? " यादे आना चाहती है , मगर बुलाने का नहीं " ।

वैसे मेरा कोई ठोस पुराव नहीं है। मै आपको किसी भी स्वरूप और अवतार में मिल सकता हूं। मै हवा की तरह हूं , जो दिखता नहीं हूं , लेकिन आप महसूस कर सकते है। मै पानी की तरह हूं , जिस आप जैसे चाहे वैसे आप घुला मिला सकते है।

एक समाज का मै बहुत बड़ा दुश्मन भी हूं - वो है विद्यार्थी समाज। हमेशा मुझे कोशते रहते है। कहते है कि उनकी परीक्षा में मै आया ही नहीं। अब आप बताइए , जब आप मुझे कहीं रखोगे तब आयुंगा ना। मेरी भी इज्जत है ना! ऐसे कैसे बिना बुलाए आ जाऊं। आखिर बात स्वाभिमान की है। इसीलिए अगर आप चाहते हो कि मै आपके बुलाने से आऊ , तो आपको कर्म और परिश्रम , दोनो करना पड़ेगा।

प्रेमी युगल के लिए तो मै मिसाल हूं। एक साथ रहे तो मुझे भाव भी नहीं देंगे , लेकिन जैसे ही बिछड़ गए , वैसे ही दिन रात बस मेरा ही नाम लेकर रोएंगे। जैसे कि मैंने है इन्हे अलग करवाया हो। इस वर्ग का मुझे लेकर अलग ही नाटक है।

अंत में रह गया बचपन - इसके साथ तो मेरा सुडौल और दृढ़ नाता है। यही तो एक क्षण है जहां मुझे संजोके रखा जाता है। मेरे साथ बिताए हर एक पल का हिसाब रखा जाता है। मेरे तो मजे ही मजे होते है। 

मै किसी के लिए जिंदगी हूं , तो किसी के लिए मौत। किसी के लिए प्रगति का पथ हूं , तो किसी के लिए दुर्गति का प्रारंभ। बाकी मेरे बारे में इतना कुछ जानकार अगर आपको मुझे बुलाने का मन करे , तो मै तैयार हूं। लेकिन थोड़ा दूर से ही - social distancing का पालन मुझे भी करना है।
बस यही अपनी कहानी है।

आप सबका साथी,
याद 🤷‍♂

- संतोष पांडेय ✍️

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