गुरु - एक ज्ञानरूपी वृक्ष !

गुरु - एक ज्ञानरूपी वृक्ष !

व्यक्ति के जीवन मे गुरु का महत्व ठीक उसी प्रकार है , जिस प्रकार वृक्ष के लिए जड़ों का महत्व है I क्या आपने कभी वृक्ष की वृद्धि होते हुए देखा है ? वृक्ष की वृद्धि में सर्वाधिक महत्व उसकी जड़ों का होता है , जो धरातल के भीतर रहकर भी वृक्ष-पोषण का कार्य करते है I तब जाकर वृक्ष छाया , फल , ऑक्सिजन , इत्यादी प्रदान करने हेतु तैयार होता है ।

ठीक उसी प्रकार , हमारे जीवन में भी गुरु का महत्व वृक्ष की जड़ों की तरह है I शिक्षक ही विद्यार्थी को सही ज्ञान की राह दिखाकर एक कुशल व्यक्ति बनाते है I हालाकि अन्य लोगों को सिर्फ हमारी कुशलता दिखती है , लेकिन उसके पीछे गुरु का अतुलनीय योगदान होता है l इसलिए हमने अपने जड़त्व को कभी भूलना नहीं चाहिए I गुरु कोई भी हो सकता है - जैसे माता, पिता, स्वयं, बंधू, मित्र, निसर्ग, अनुभव, प्राणी, इंसान, तकनीकी, पुस्तक , इत्यादी।

- संतोष पांडेय✍ 

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