सफर का असर !

सफर का असर !

जीवन का सफर भी बहती नदी की बहाव ( प्रवाह ) की तरह है । अब पूछो कैसे ?

आप लोगों ने कभी कभी नदी के बहाव को ध्यानपूर्वक देखा है ? नदी तब तक सरलता से बहती है , जब तक उसके मार्ग में कोई चट्टान ( बाधा ) ना आए I लेकिन जब कोई चट्टान उसके मार्ग मे आता है , तब नदी को भी अपने बहाव के लिए संघर्ष करना पड़ता है I अंत मे नदी और चट्टान के उसी संघर्ष से नदी को एक नैसर्गिक सुंदरता प्राप्त होती है , जिसे हम झरना कहते है I

ठीक उसी प्रकार , जीवन के सफर में भी हमेशा सुख नहीं होता , कभी कभी दुख का भी सामना करना पड़ता है I क्युकी दुख एक ऐसा मोड़ होता है, जो मानव को संघर्ष करना सिखाता है I और जो व्यक्ति संघर्ष से उभरता है , उसके लिए जीवन का अर्थ सुख से भी परे होता है I इसे ही सफलता कहते है I इसीलिए बाधाओ को देखकर मुह फेरने से अच्छा है , संघर्ष करके आगे बढ़ना I

मुझे अपने पाठशाला के समय की एक कविता की कुछ पंक्तिया आज भी याद है I और वो है -
" झल झल नदिया बहती है ,
हम सबसे यह कहती है I
जीवन बहाता पानी है ,
रकाना अंत की निशानी है I "

- संतोष पांडेय✍ 

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