दिल-ए-पुराण !

दिल-ए-पुराण 

माई के माथे के सिन्दूर ने ,
बापू को वचनो मे बांधा है I
दिल को कहा आखें होती है ,
ये प्रेम मे बन बैठा अंधा है ।।

शक्ति के शक्ति का ,
शिवा को भी ज्ञान है ।
कहा रह गई कमी मुझमे ,
इस बात से दिल हैरान है ।।

राधा के प्रेम का ,
कन्हैया भी गवाह है ।।
तू चाहे मुझे भूल जाये ,
दिल को आज भी तेरी परवाह है ।।

रिद्धी-सिद्धी बहनों के साथ ,
गणराया का स्नेह गहरा है ।।
तुझसे जुड़ी हर एक यादों पर ,
इस दिल का कडा पहारा है ।।

कलयुग में हर सीता को ,
राम का ही इन्तेज़ार है ।।
चाहकर भी कुछ कर नहीं सकता ,
ये दिल कितना लाचार है ।।

लक्ष्मी का सम्मान करना ,
नारायण का कर्तव्य है ।।
तू साथ मेरे हो ना हो ,
तेरा नाम ही मेरे लिए पर्व है ।।

- संतोष पांडेय✍

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