सोनू-धनू !

सोनू-धनू दो भाई थे ,
करते खुब लड़ाई थे I

सोनू धनू से लंबू था ,
धनू सोनू से टिंगू था I

सोनू धनू से कुछ कहता था ,
तो धनू भी चूप नहीं रहता था I

बोल बीच मे पड़ता था ,
और सोनू से लड़ बैठता था I

एक दिन सोनू हुआ खड़ा ,
और धनू पर टूट पड़ा I

छिड़ गई महाभारत भारी ,
गिरी मेज कुर्सी सारी I

यह सुनकर माँ घबराई ,
झाडू लेकर बाहर आई I

दोनों को दिए दो-दो जड़कर ,
कहा क्या मिला तुम्हें लड़कर I

खबरदार जो फिर कभी लड़े ,
बंद करो अब यह सब झगड़े ।

दोनों ने हंसकर हाथ मिलाई ,
इसी में थी सोनू-धनू की भलाई ।

- संतोष पांडेय ✍

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