रावण कहा है ?
रावण कहा है ?
मैंने सुना है, रावण बुरा इंसान था ? उसके दस सिर थे, जिसमें उसके दस गुणों का वास था I क्या यह भी सत्य है की रावण महा-बलशाली, महान-भक्त और एक बुद्धिजीवी था I परंतु मैं क्या बोलता हू, क्या हम सब जानते है असली रावण कहा है और उसकी दस सिरों की विशेषताएं क्या है ?
काम, क्रोध, मोह, लोभ, मत्सरता, मानस, बुद्धि, चित्त, अहंकार, मद - यह है रावण के दस सिर ! रावण ने अपने हर एक भावना के लिए एक अलग सिर नियुक्त किया था I लेकिन हम इंसान ऐसे बुद्धिजीव है जिनके एक ही सिर में ये सारी भावनाओ का वास है और भावनाओ के इसी जाल में फंसकर हमारी मानसिक अवस्था अमानवीय होती जा रही है I हम बेकार में हम रावण को बाहरी दुनिया मे खोजते है I हमे लगता है रावण मर चुका है I लेकिन एक बात हम भूल जाते है कि आज भी हर इंसान के भीतर एक रावण है, जो आज भी जिंदा है I अपितु, आज का इंसान रावण से भी कई गुना भयानक है I वो ना ही पूरी तरह रावण है और नाही राम I इसी उलझन की वजह से ना इंसान घर घर का है, ना घाट का ! हमे पहले अपने भीतरी राक्षस को मारना होगा I अपनी भावनाओ पर नियंत्रण पाना होगा I तब जाकर कहीं इस दुनिया मे कहीं अमन और शांति का युग आएगा I
- संतोष पांडेय✍
मैंने सुना है, रावण बुरा इंसान था ? उसके दस सिर थे, जिसमें उसके दस गुणों का वास था I क्या यह भी सत्य है की रावण महा-बलशाली, महान-भक्त और एक बुद्धिजीवी था I परंतु मैं क्या बोलता हू, क्या हम सब जानते है असली रावण कहा है और उसकी दस सिरों की विशेषताएं क्या है ?
काम, क्रोध, मोह, लोभ, मत्सरता, मानस, बुद्धि, चित्त, अहंकार, मद - यह है रावण के दस सिर ! रावण ने अपने हर एक भावना के लिए एक अलग सिर नियुक्त किया था I लेकिन हम इंसान ऐसे बुद्धिजीव है जिनके एक ही सिर में ये सारी भावनाओ का वास है और भावनाओ के इसी जाल में फंसकर हमारी मानसिक अवस्था अमानवीय होती जा रही है I हम बेकार में हम रावण को बाहरी दुनिया मे खोजते है I हमे लगता है रावण मर चुका है I लेकिन एक बात हम भूल जाते है कि आज भी हर इंसान के भीतर एक रावण है, जो आज भी जिंदा है I अपितु, आज का इंसान रावण से भी कई गुना भयानक है I वो ना ही पूरी तरह रावण है और नाही राम I इसी उलझन की वजह से ना इंसान घर घर का है, ना घाट का ! हमे पहले अपने भीतरी राक्षस को मारना होगा I अपनी भावनाओ पर नियंत्रण पाना होगा I तब जाकर कहीं इस दुनिया मे कहीं अमन और शांति का युग आएगा I
- संतोष पांडेय✍
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