मै कौन हूं ?

मै कौन हूं ?

मैं एकमात्र व्यक्ति हूं जो पूरी तरह से अपने आप को जानता हूं। हालांकि जब भी लोग मुझसे अपने बारे में कुछ बताने के लिए कहते हैं तो मैं अक्सर उलझन में पड़ जाता हूँ। मैं ज्यादातर समय यह सोच कर घबरा जाता हूँ कि मुझे कहना क्या है ? बहुत से लोग इस परेशानी का अनुभव करते हैं और यह अक्सर बहुत शर्मनाक होता है , जबकि हम खुद को अच्छी तरह जानते हैं। हमें पता होना चाहिए कि कैसे खुद को परिभाषित करना है। क्या आपके साथ ऐसा हुआ है कि किसी वार्तालाप के दौरान आपको अपने बारे में कुछ बोलने के लिए कहा गया हो और आप असमंजस में पड़ गए हो ?

मुझे नाम किसी और ने दिया , जन्म किसी और ने दिया , पालन पोषण किसी और ने किया , शिक्षा किसी और ने दिया , काम किसी और के लिए करता हूं , पैसे कोई और देता है। तो इन सब मै कौन हूं ? इन सब के बिना मेरा वजूद क्या है ? मै दूसरो को गूगल , फेसबुक , इंस्टाग्राम , ट्विटर , पुस्तक , इतिहास , और न जाने कहां कहा ढूंढता हूं , लेकिन कभी खुद को क्यू नहीं ढूंढा ? जीं हा, ज्यादातर लोग इस समस्या का सामना करते हैं। क्या यह विडंबना नहीं है कि हम खुद को परिभाषित करने में सक्षम नहीं हैं ? 

लोग मुझे अलग-अलग नामों से बुलाते हैं - कुछ मुझे बड़बड़ी कहते हैं, कुछ मुझे हठी कहते हैं, कुछ मुझे गुस्सैल कहते हैं जबकि कुछ कहते हैं कि मैं अपने आप में रहता हूं। लोगों को दूसरों के बारे में बात करने की आदत होती है। वे दूसरों के बारे में बातें फ़ैलाने के लिए तत्पर रहते हैं। मुझे लगता है कि किसी के भी बारे में बातें फ़ैलाना गलत है। हम इंसान हैं और हम हर दिन कई भावनाओं का अनुभव करते हैं। मैं हर दिन विभिन्न भावनाओं के मिश्रण का अनुभव करता हूं ।

मै वो व्यक्ति हूं जो जीवन के हर पल का आनंद लेता हूं। मैं अपने रिश्तेदारों, पड़ोसियों या अन्य लोगों के जीवन में हस्तक्षेप करना पसंद नहीं करता और उनसे भी यही उम्मीद करता हूं। मैं चाहता हूं कि वे अपने दूसरों के कामों में टांग अड़ाने की बजाए अपने स्वयं के कामों में व्यस्त रहे। लोग अक्सर मेरे इसी शांत स्वभाव को गलत समझ बैठते हैं और समझते हैं कि मैं अभिमानी और बिगड़ैल हूँ। उन्हें लगता है कि मेरा रवैया गलत है और मैं खुद को उनसे बेहतर समझता हूं। पर यह सच नहीं है ।

मैं भी काफी अनुशासित हूँ। हर सुबह जाग कर मैं सूची तैयार करता हूं कि मुझे क्या-क्या करना है। मैं उसी क्रम में कार्य करना चाहता हूं जो मैंने तैयार किया है। समय सीमा के भीतर करना चाहता हूँ जो मैंने अपने लिए निर्धारित किया है तथा इसे पूरा करने की अपनी पूरी कोशिश करता हूं। समय पर इन कार्यों को पूरा करने में सक्षम नहीं होने से मुझे असंतुष्टता होती है और मुझे गुस्सा भी आता है।

यह सब पढ़कर मेरे बारे में कोई धारणा मत बना लेना , क्युकी मैंने पहले ही कहा है - मुझे मुझसे अधिक कोई नहीं जान सकता। क्युकी " मै और मेरा " इन सबसे ऊपर भी मेरा खुद का अस्तित्व है। बस मुझे इसी का शोध करना है।

- संतोष पांडेय ✍

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